संघटनात्मक रचना
:
विद्याभारती
संघटन में बहुत ही मजबूत संघटनात्मक रचना और अच्छी तरह से परिभाषित पदक्रम दिखायी देता है । इस रचना में विविध स्तरों पर (जैसे की
राष्ट्रीय, क्षेत्र, राज्य,
जिला और संकुल स्तर तक ) विविध पद सौंपे गये
है । हर पद का दायित्व परिभाषित है । उस पद पर कार्यरत व्यक्ती अपने दायित्व को अच्छी तरह से जानते और समझते हैं |
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प्रतिबद्ध और
निष्ठावान
कार्यकर्ता
:
विद्याभारती
में १,३०,००० शिक्षक कार्यरत हैं, जिनके लिये यह महान पेशा सिर्फ एक व्यवसाय नही बल्की समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण का माध्यम है । इन शिक्षकों के साथ सेकडों समर्पित कार्यकर्ता भी इस कार्य में जुटे हैं, जिनमें से अधिकतर विद्याभारती के पूर्ण कालिक कार्यकर्ता भी
हैं ।
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समाज में
छबी
:
गत ५०-६० सालों से,
निरंतर और अथक प्रयासों के आधार पर, “संपूर्ण भारतीय शिक्षापद्धती” पर
आधारित संस्कारयुक्त और सेवाभावी शिक्षणपद्धती विद्याभारती में उभरकर आयी है । इन सालों में विद्यालयों , शिक्षकों और छात्रों की
संख्या में हो रही निरंतर वृद्धि यह दर्शाती है कि समाज को विद्याभारती पर पूरा विश्वास है ।
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व्यापक जनाधार
:
विद्याभारती
का यह विश्वास है की शिक्षा समाज का दायित्व है । शिक्षा कभी बेची ना जाये बल्की हमेंशा प्रदान की जाये । इसलिये विद्याभारती ने ऐसी रचना विकसित की है जिसमें बुनियादी सुविधाओं का निर्माण, मानव संसाधन व्यवस्थापन,
छात्र कल्याण आदी के लिये कोष जुटाने का दायित्व समाज उठाता है । बडी मात्रा में जुडे हुए दाता और हितचिंतक मिलकर यह उत्तरदायित्व निभाते हैं ।
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बुनियादी ढाँचा
:
अनेक
सालों से विकसित होते होते, विद्याभारती के अधिकतम विद्यालयों ने
खुद की जमीन पर भवन का निर्माण किया है । इसके साथ प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य
मूलभूत साधन सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में है ।
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