Tuesday, 17 May 2016

विद्याभारती के सामर्थ्यस्थान


   संघटनात्मक रचना :
विद्याभारती संघटन में बहुत ही मजबूत संघटनात्मक रचना और अच्छी तरह से परिभाषित पदक्रम दिखायी देता है इस रचना में विविध स्तरों पर (जैसे की राष्ट्रीय, क्षेत्र, राज्य, जिला और संकुल स्तर तक ) विविध पद सौंपे गये है हर पद का दायित्व परिभाषित है उस पद पर कार्यरत व्यक्ती अपने दायित्व को अच्छी तरह से जानते और समझते हैं |

-          प्रतिबद्ध और निष्ठावान कार्यकर्ता :
विद्याभारती में ,३०,००० शिक्षक कार्यरत हैं, जिनके लिये यह महान पेशा सिर्फ एक व्यवसाय नही बल्की समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण का माध्यम है इन शिक्षकों के साथ सेकडों समर्पित कार्यकर्ता भी इस कार्य में जुटे हैं, जिनमें से अधिकतर विद्याभारती के पूर्ण कालिक कार्यकर्ता भी हैं

-          समाज में छबी :
गत ५०-६० सालों से, निरंतर और अथक प्रयासों के आधार पर, “संपूर्ण भारतीय शिक्षापद्धतीपर आधारित संस्कारयुक्त और सेवाभावी शिक्षणपद्धती विद्याभारती में उभरकर आयी है इन सालों में विद्यालयों , शिक्षकों और छात्रों की संख्या में हो रही निरंतर वृद्धि यह दर्शाती है कि समाज को विद्याभारती पर पूरा विश्वास है

-          व्यापक जनाधार :
विद्याभारती का यह विश्वास है की शिक्षा समाज का दायित्व है शिक्षा कभी बेची ना जाये बल्की हमेंशा प्रदान की जाये इसलिये विद्याभारती ने ऐसी रचना विकसित की है जिसमें बुनियादी सुविधाओं का निर्माण, मानव संसाधन व्यवस्थापन, छात्र कल्याण आदी के लिये कोष जुटाने का दायित्व समाज उठाता है बडी मात्रा में जुडे हुए दाता और हितचिंतक मिलकर यह उत्तरदायित्व निभाते हैं ।

-          बुनियादी ढाँचा :
अनेक सालों से विकसित होते होते, विद्याभारती के अधिकतम विद्यालयों ने खुद की जमीन पर भवन का निर्माण किया है इसके साथ प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य मूलभूत साधन सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में है

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