विद्याभारती संघटन का निरंतर विकास और विद्यालयों की संख्या में निरंतर वृद्धि निश्चित प्रेरणादायी है । लेकीन दूसरी ओर से देखा जाये तो यह विकास और वृद्धि, संघटन के लिये हमेंशा कुछ चुनौतियाँ खडी करता है - पूरे संघटन पर एकसाथ निगरानी की चुनौती । विद्याभारती जैसे विशाल संघटन के संबंध में सोचा जाये, खास तौर पर निरंतर
बढनेवाली विद्यालयों और छात्रों के बारे में, तो पता
चलता है की विद्याभारती को मुख्य रूप से जिन चुनौतियों का सामना करना पड रहा है, वे है
समाकलन, समन्वय और संघटन में चैतन्य बनाये रखना । ऐसे समय पर संघटन के हर हिस्से पर, हर विद्यालय
पर एकसाथ नजर रखना जटिल बनता है । यह जानना मुश्कील होता है कि अपने विशाल आकार का असर कही संघटन के लक्ष्य पर, संस्कृती पर तो
नही हो रहा ? पूरे संघटन का एकसाथ
सामायिक पर्यवेक्षण करना आसान नही रहता ।
अपरिहार्य
रूप से
ऐसी स्थिती
में पूरे
संघटन के
गुणवत्ता का
स्तर बनाये
रखना और
संघटना की
क्षमता को
बढाना यह
सबसी बडी
चुनौती बन
जाती है
।
विद्यालय ही विद्याभारती के सभी क्रियाकलापों का केंद्रबिंदू होने के कारण हर एक विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को जाँचना और इस गुणवत्ता को सुधारने का प्रयास करना यह आज विद्याभारती के लिये प्राथमिकता है । विद्यालयों
की गुणवत्ता
बढाने के
लिये विद्यालय में
विशिष्ट ऐसे कौनसे प्रयास किये
जाये, और
राष्ट्रीय स्तर
पर कौनसी
योजनाएँ बनायी
जाये, यह
निर्णय लेने
के लिये
तथ्य और
आधार-सामग्री
को जुटाना
यह विद्याभारती
के सामने
खडी महत्वपूर्ण
चुनौती है
।